
एमपी आरडीसी के द्वारा रोड निर्माण से पहले ही
निर्देश दिए जाते हैं कि जहां पर पुल पुलिया का निर्माण का कार्य किया जाना हो वहां सांकेतिक मार्ग के बोर्ड से ले करके परिवर्तन मार्ग का निर्माण किया जावे ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना घटित ना हो और यात्री सुगमता से अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर सके।
परंतु खडी से पोलायकला सुंदरसी 11 किलोमीटर मार्ग इन दिनो ठेकेदार की उदासीनता के चलते आम नागरिकों के लिए परेशानी कारण बना हुआ है यहां रोजाना कीचड व क्षतिग्रस्त भरे मार्ग से जान जोखिम मे डालकर किसानो को अपने पशुओं की भूसे की व्यवस्था करने के लिए 4 किलोमीटर की पैदल यात्रा करनी ही पड़ रही है।

वही पर जिला मुख्यालय के लिए अपने गंतव्य की ओर आने जाने वाले यात्रियों को जान जोखिम मे डालकर बाइक से सफर करना पड़ रहा है क्योंकि ठेकेदार के द्वारा जहां पर पुलिया निर्माण किए गए हैं वहां पर परिवर्तित मार्ग मिट्टी डाल करके बनाया गया था वह पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर के नाले में तब्दील हो गया जिससे यात्री व किसान गिरते उठते पढ़ते हुए 4 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर रहे हैं।



ग्रामीण बोले चरनोई की भूमि से अवैध उत्खनन कर बना दी सड़क

एक तरफ तो देश के प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रदेश से भ्रष्टाचार को खत्म करने में लगे हुए हैं वहीं पर जिले में करोड़ों की लागत से खडी से पोलायकला सुंदरसी जोड़ तक के 11. 19 किलोमीटर लंबे मार्ग का एमपी आरडीसी द्वारा सड़क निर्माण कार्य किया जा रहा है।
उस वक़्त भी हमारे रघुनदन सिंह डोडिया भीमसिह डोडिया यशवतसिह सोनगरा सहित सैकडौ ग्रामीणो के द्वारा ठेकेदार की खनिज विभाग से बिना परमीशन लिए जो चरनोई भूमि से अवैध उत्खनन करके लाखों रुपए राजस्व बचाकर 11 किलोमीटर की सड़कों पर मुरम बोलडर डाल दी गई।
जिसकी शिकायत करने के बाद भी प्रशासन के कानो तक आवाज नहीं पहुंच पाई जबकि खनिज चोरी के मामले जिले मे चरम पर है तो वहीं इस मार्ग को भी बगैर रॉयल्टी के खनिज से सबंधित निर्माण एजेंसी द्वारा सजाकर ठेकेदार द्वारा लगभग पूरे इस मार्ग का भराव कर दिया गया है।
पुलिया निर्माण में किया जा रहा है घटिया सामग्री का उपयोग
ग्रामीणों ने पुलिया निर्माण में उपयोग की जा रही निर्माण सामग्री पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब धरातल पर ही हमारी आंखों के सामने ठेकेदार के द्वारा घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है और हमारे विरोध करने के बाद भी पुलिया निर्माण मे घटिया सामग्री लगाई जा रही है।

तो इससे बढ़कर भ्रष्टाचार का उदाहरण और क्या होगा जबकि प्रधानमंत्री से ले करके मुख्यमंत्री मोहन यादव तक निर्देश दे चुके हैं कि धरातल पर भ्रष्टाचार बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा लेकिन आला अधिकारी व इंजीनियर के द्वारा मनाने को तैयार नही है ओर इस घटिया निर्माण को नजर अंदाज किया जा रहा है इससे यह सब जाहिर होता है कि ठेकेदारों पर प्रशासन का अंकुश बचा नहीं है और वह सिर्फ ठेकेदारों का संरक्षण करने में लगे हए हैं।
Author: Deepak Mittal









