
राजनांदगांव । विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर शासकीय आयुष पॉलीक्लीनिक चिखली में हेपेटाइटिस बीमारी के संबध में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
इस दौरान जिला आयुष अधिकारी डॉ. शिल्पा पाण्डेय ने बताया कि हेपेटाइटिस बी संक्रमित ब्लड, सुई, असुरक्षित यौन सम्बन्ध, दूसरे की संक्रमित शेविंग किट, टैटू बनवाने, गर्भवती माता से उसके बच्चे को हो सकता है।
हेपेटाइटिस बी में वायरस के कारण लिवर में संक्रमण हो जाता है। लापरवाही करने पर लिवर खराब होने और लिवर कैंसर होने का भी खतरा रहता है। उन्होंने हेपेटाईटिस बी टीका के संबंध में जानकारी देकर लोगों को टीका लगाने के लिए प्रेरित किया। हेपेटाइटिस सी भी संक्रमित रक्त के माध्यम से हो सकता है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त ब्लड डोनेशन के पूर्व हेपेटाइटिस बी व सी का जांच अवश्य कराएं।
आयुर्वेद चिकित्साधिकारी आयुष पॉलीक्लिनिक डॉ. प्रज्ञा सक्सेना ने बताया कि हेपेटाइटिस लिवर से जुड़ी एक बीमारी है, जिसमें लिवर में सूजन आ जाती है और इसके कारण कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है। हेपेटाइटिस आमतौर पर वायरल इंफेक्शन के कारण होने वाली समस्या है।
इसके अलावा अत्यधिक अल्कोहल लेने की आदत, कुछ दवाएं जिनका अधिक प्रयोग, अत्यधिक तेल व मसाले वाला भोजन और किसी विशेष तरह की मेडिकल कंडीशन के कारण भी हेपेटाइटिस की समस्या हो सकती है। इस बीमारी के कई वेरिएन्ट्स हैं। जिनमें ए, बी, सी, डी और ई इनमें हेपेटाइटिस बी एवं सी को खतरनाक माना जाता है। हेपेटाइटिस ए में वायरस का संक्रमण दूषित भोजन व पानी से होता है।
हेपेटाइटिस के लक्षणों में बुखार, उल्टी, भूख नहीं लगना वजन कम होना, पेट में दर्द एवं आँखों व त्वचा के सफेद भाग का पीला होना, पेशाब में पीलापन होता है। इससे बचने के लिए दूषित एवं ज्यादा तेल-मसाले वाले खानपान से बचें एवं स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।
इस अवसर पर औषधीय पौधे कालमेघ, चिरायता, एलोवेरा, गिलोय का वितरण किया गया और औषधीय पौधों के महत्व के संबंध में जानकारी दी गई। कार्यक्रम में योग चिकित्सक डॉ. भारती यादव, संस्था के सभी कर्मचारी एवं आम नागरिक उपस्थित थे।
Author: Deepak Mittal









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