नये कानून के लागू हो जाने से न्याय प्रक्रिया और मजबूत होगी-देवांश सिंह राठौड़ एसडीओपी बालोद

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नये कानून के लागू हो जाने से न्याय प्रक्रिया और मजबूत होगी-देवांश सिंह राठौड़ एसडीओपी बालोद

दीपक मित्तल प्रधान संपादक नवभारत टाइम्स 24×7.in

 

नया कानून के संबंध में प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन जनपद पंचायत बालोद में किया गया 

 

 बालोद/ रायपुर,जनपद पंचायत बालोद के सभागार में जनपद सदस्यों, सरपंचो, जनप्रतिनिधियों सचिवो एवं बड़ी संख्या में पहुंचे जनमानस को संबोधित करते हुए देवांश सिंह राठौड़ एसडीओपी बालोद ने नए कानून की जानकारी दिया और कहा कि नए कानून के लागू हो जाने से पीड़ितों को जहां लाभ मिलेगा वहीं दूसरी ओर अब समस्याओं को निराकरण भी शीघ्र होने लगेगा, उन्होंने नए कानून के संबंध में बारीकी से उपस्थित जनों को टिप्स दिए,,,

 पीतांबर यादव मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने भी नए कानून को लेकर विस्तार पूर्वक जानकारी दिया,,

 कानूनों में एकरूपता लाने, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नये कानून भारतीय न्याय संहिता भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता भारतीय साक्ष्य अधिनियम 01 जुलाई से प्रभावशील होगा। इन तीनो कानूनो के प्रति लोगो मे जागरुकता लाने के उद्देश्य से जनपद पंचायत बालोद के सभागार मे एक परिचर्चा का आयोजन किया,,,

 कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि देवांश सिंह राठौड़ एसडीओपी बालोद और विशेष अतिथि पीतांबर यादव सीईओ जनपद पंचायत बालोद थे,,

परिचर्चा को सम्बोधित करते हुए

देवांश सिंह राठौड़ एसडीओपी बालोद ने बताया कि इस कानून के लागू हो जाने से न्याय प्रक्रिया और मजबूत होगी। उन्होने बताया कि इस कानून के लागू हो जाने से लोगो की मानसिकता परिवर्तन होगी और गवाह सामने आयेगे। इस कानून के तहत पुलिस और कोर्ट को समय सीमा का निर्धारण किया गया है। इसके साथ ही पीड़ित पक्ष की सुविधाओ को रखा गया है। इसके अलावा केस का जल्द निराकरण किया जायेगा। जिससे विचाराधीन बंदियो को फायदा मिलने की बात कही। इस मौके पर पीतांबर यादव सीईओ जनपद बालोद ने बताया कि सभी को न्याय समय पर मिल सके इसी उद्देश्य को लेकर केन्द्र सरकार नये कानून को लागू किया जा रहा है। इस कानून के तहत विडियो ग्राफी सहित नये धाराओ पर बल दिया गया है। और आई पी सी की धाराओ को विलोपित किया गया है। इस कानून का लागू हो जाने से पुलिस विवेच को प्रार्थी पीडितो को फायदा पहुंचेगा। ई-एफआईआर, जीरो-एफआईआर ई-साक्ष्य के संबंध में जानकारी दी गई। उल्लेखनीय है कि पुराने कानून ब्रिटिश काल से चले आ रहे थे। जिसे प्रासंगिक बनाने के लिए एवं निर्धारित समय-सीमा में प्रकरणों का समाधान करने के लिए परिवर्तन किया गया है। इस बदलाव से अपराधियों के खिलाफ एफआईआर करने में दिक्कत नहीं होगी तथा गंभीर अपराधियों को प्रक्रिया का पालन करते हुए कड़ी कार्रवाई की जा सकेगी,,

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Author: Deepak Mittal

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