हाई कोर्ट ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी पर 10 हजार का जुर्माना लगाया
नव भारत टाइम्स 24 x 7 के ब्यूरो चीफ जे.के. मिश्रा की रिपोर्ट:
बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी के चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए विश्वविद्यालय पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता छात्राओं को नियमानुसार पीएचडी में चयनित किया जाए और यह राशि उन्हें दी जाए।
याचिका अधिवक्ता पलाश तिवारी के माध्यम से दायर की गई थी, जिसमें बताया गया कि वाड्रफनगर निवासी अंजली तिवारी और ज्योतिका ने विश्वविद्यालय के बायोटेक विभाग में पीएचडी करने के लिए लिखित परीक्षा और इंटरव्यू दिया था। यूजीसी के नियमों के अनुसार, लिखित परीक्षा के लिए 70 प्रतिशत और इंटरव्यू के लिए 30 प्रतिशत निर्धारित थे।
अंजलि ने इस परीक्षा में शीर्ष स्थान प्राप्त किया और ज्योतिका दूसरे स्थान पर रहीं। हालांकि, 11वें रैंक की प्राची और 32वें रैंक की शिवांगी का चयन कर लिया गया। इन दोनों को इंटरव्यू में अत्यधिक अंक दिए गए थे, जबकि शीर्ष 10 अभ्यर्थियों को 15 से अधिक अंक नहीं मिले। इस मामले को पहले सिंगल बेंच में उठाया गया था, लेकिन परिणाम संतोषजनक नहीं होने पर डिवीजन बेंच में अपील की गई।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में अधिवक्ता पलाश तिवारी ने तर्क दिया कि दोनों परीक्षाओं के अंकों का प्रतिशत के आधार पर निकाला जाना चाहिए था, लेकिन विश्वविद्यालय ने सीधे अंकों को प्रतिशत में बदल दिया। यूजीसी के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
गलत प्रक्रिया अपनाई गई
सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय ने चयन प्रक्रिया में गलत प्रक्रिया अपनाई है और प्रतिशत और अंक को नियमानुसार नहीं लिया गया।
Author: Deepak Mittal












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