नई दिल्ली: ग्रेटर नोएडा में सड़क सुरक्षा में लापरवाही एक बार फिर जानलेवा साबित हुई। घने कोहरे के बीच एक 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार ड्रेनेज की बाउंड्री से टकराकर गहरे गड्ढे में गिर गई, जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश फैल गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, हादसा शुक्रवार रात सेक्टर-150 के पास हुआ। मृतक की पहचान युवराज मेहता के रूप में हुई है, जो काम से घर लौट रहे थे। घने कोहरे और सड़क पर रिफ्लेक्टर व चेतावनी संकेतों के अभाव में उनकी कार दो ड्रेनेज बेसिन को अलग करने वाली ऊंची जगह से टकरा गई और करीब 70 फुट गहरे, पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार के पानी में डूबते ही युवराज ने मदद के लिए आवाज लगाई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, गोताखोर और एनडीआरएफ की टीमों ने बचाव अभियान शुरू किया। इस दौरान युवराज के पिता राजकुमार मेहता भी मौके पर मौजूद रहे। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद कार और युवराज को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
घटना के बाद मृतक के परिवार ने शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन ने न तो सड़क पर रिफ्लेक्टर लगाए थे और न ही सर्विस रोड के किनारे बनी नालियों को ढका गया था। युवराज के पिता ने कहा कि घने कोहरे में सुरक्षा इंतजामों की कमी के कारण उनके बेटे की जान चली गई।
नॉलेज पार्क थाना प्रभारी सर्वेश कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन भी किया। उनका कहना है कि वे लंबे समय से सर्विस रोड पर रिफ्लेक्टर और सही साइन बोर्ड लगाने की मांग कर रहे थे, लेकिन प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।
प्रदर्शन के बाद अधिकारियों ने मौके पर रिफ्लेक्टर लगाने के निर्देश दिए हैं और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
Author: Deepak Mittal










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