लोकेशन -अम्बिका सोनवानी
घरघोड़ा जिला रायगढ़
अवैध वसूली का अड्डा बना थाना घरघोड़ा
शराब-जुए से लेकर हर मामले में उगाही चरम सीमा पर
घरघोड़ा:-विभाग के एक प्रधान आरक्षक ने स्वेछाचरिता कि सारी हदे लांघते हुए सेवा के बदले मेवा का अपने अलग ही सिद्धांत बनाते हुए थाने को ही वसूली का अड्डा बना लिया है। अपने पदेन दायित्वों के निर्वाहन के उलट उक्त प्रधान आरक्षक कई गांव में अवैध तरीके से बनाए जा रहे कच्ची शराब, जुआ, चोरी के मामलो में अवैध उगाही किए जाने की बात सूत्रों के हवाले से प्राप्त हुई है इस कदर खुलेआम कर रहा है कि सूत्रों के अनुसार बने प्रधान आरक्षक कि अवैध उगाही संबंधी बातचीत जो जल्द सबके सामने आएगा। वर्दी के मद में चूर उक्त प्रधान आरक्षक द्वारा रेत तस्करों से भी लेन देन और अवैध वसूली कि जा रही है साथ ही शराब और जुए के मामलो में भी केस न बनाने के नाम पर हेड के हिसाब से रकम उगाही कर पुलिस कि साख पर बट्टा लगाने में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही
अवैध उगाही कर अपने वर्दी का गलत उपयोग करने वाले ऐसे लोगो को समझना चाहिए कि यह वर्दी उन्हें सरकार ने समाज और नागरिकों कि सेवा के लिए दी है ना कि उन्हें डरा धमका कर उनसे अवैध वसूली कर अपनी जेबे गर्म करने पर घरघोड़ा थाने के प्रधान आरक्षक द्वारा अपनी वर्दी का धौन्स जमा कर वसूली को अपने बिजनेस बना लिया गया है अब इसके लिए चाहे कानून और पदेन कर्तव्य कि बलि ही क्यों न देनी पड़े अब ज़ब तब यह देखने वाले बात होंगी कि वसूली भाई के अवैध उगाही के सिलसिले का अंत कब तक होता है या सिस्टम कि मेहरबानी के तले प्रधान आरक्षक का वसूली का धंधा बड़े पैमाने पर फल फूल रहा है।
शराब का खेल का अलग दुनिया
इस प्रधान आरक्षक का रुतबा इतना है कि गांव में किसी आदिवासी यदि पीने के लिए भी शराब रखता है तो ये अधिकारी उठा कर थाना में बंद कर देता है और लम्बा चढ़ावा पर ही जमानतीय केश बनाना जाता है। चढ़ावा का खेल लाखो में आंकी गई है।अपनी कमाई से अनुविभाग के बड़े अधिकारी भी इस प्रधान आरक्षक को अपने आंखो के तारे बना हुआ है।
नई सरकार की जीरो भ्रष्ट्राचार पर ये अधिकारी दाग नजर आ रहा है ज्ञात होगी थाना प्रभारी के सह के बिना यह कार्य किया जाना शायद संभव नहीं है
Author: Deepak Mittal










Total Users : 8173568
Total views : 8202976